बुधवार, 12 जून 2013

या रब



यह कुर्सियां
तू उनके सर में दे मार
जिन्हें इनकी चाहत है

मुझे  तो  तू  बस
अपने इश्क से नवाजा कर ...!

2 टिप्‍पणियां:

  1. इस ब्लॉग के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं.....लगता है, इस ब्लॉग पर सब कुछ बड़े ही व्यवस्थित अंदाज में आने वाला है. (शब्द मोडरेशन हटा देवें...!)

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    1. प्रिय श्रीश
      व्यवस्था और श्याम... दूर तक कोई मेल नहीं ...आप मित्र लोग ही मिलकर, बचा सको तो बचा लो इस ब्लॉग को श्याम की ज्यादतियों से...शायद बच जाए !

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