मैं समुद्र ही हो सकता था
शुक्रवार, 14 जून 2013
राहें
वे कुएं पोखर हैं
जिन्हें बंधन सुहाते हैं
नदी सागर
अपनी राहें खुद बनाते हैं... !!
1 टिप्पणी:
अभिषेक आर्जव
10 अक्टूबर 2013 को 10:06 am बजे
ह्म्म
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