मैं समुद्र ही हो सकता था

शनिवार, 15 जून 2013

नदी

नदी


मेरी माँ है
मेरी प्रेयसी है

मेरी कविता है

सब एक साथ है...!
***

Posted by श्याम जुनेजा at 5:51 am 3 टिप्‍पणियां:
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श्याम जुनेजा
Jammu, Jammu and Kashmir, India
लेखन से जुड़ने के बाद जान पाया सतत विस्थापन मेरी नियति थी ...कभी देह के तल पर कभी मन के तल पर ...जैसे पैरों के नीचे टिकने के लिए जमीं कभी थी ही नहीं .उपलब्धियों के नाम पर फ़िलहाल एक रचना संकलन "मैं समुद्र ही हो सकता था" जम्मू-कश्मीर अकैडमी ऑफ़ आर्ट, कल्चर एंड लैंग्वेजिज़ द्वारा २०१० में सम्मानित!
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