शुक्रवार, 14 जून 2013

मुझे मिले

उसने कहा 
जीवन संघर्ष है 

मुझे लगा 
जीवन प्रेम है 

और हम 
निकल पड़े 
अपनी अपनी डगर 

उसे क्या मिला 
मुझे नहीं मालूम 

मुझे मिली आँखें 
तुम 
और यह पंख ...!
***

राहें

वे कुएं पोखर हैं
जिन्हें बंधन सुहाते हैं

नदी सागर
अपनी राहें खुद बनाते हैं... !!