मैं समुद्र ही हो सकता था
मंगलवार, 16 जुलाई 2013
नदी की धारा में
बूँद-बूँद जल
भंवर बुनता है
समय की धारा में
एक-एक पल
रचता है अंध-विवर...
और शब्द ?
शब्द ब्रह्म है साक्षात
जो मांगो वही देता है...!
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