मैं समुद्र ही हो सकता था
सोमवार, 17 जून 2013
कितनी भली थी वह रात
जब वह पहली बार मिली थी
अलकें कुछ बिखरी-बिखरी
नूरानी चेहरे पर
यही हँसी थीं
उस रात
जब कौंधी थी उस
पहले चुम्बन की बिजली
पलकों में कैसी दावत थी
वह कैसी खिली-खिली थी
कितनी भली थी वह रात
जब वह पहली बार मिली थी
शनिवार, 15 जून 2013
नदी
नदी
मेरी माँ है
मेरी प्रेयसी है
मेरी
कविता
है
सब एक साथ है...!
***
शुक्रवार, 14 जून 2013
मुझे मिले
उसने कहा
जीवन संघर्ष है
मुझे लगा
जीवन प्रेम है
और हम
निकल पड़े
अपनी अपनी डगर
उसे क्या मिला
मुझे नहीं मालूम
मुझे मिली आँखें
तुम
और यह पंख ...!
***
राहें
वे कुएं पोखर हैं
जिन्हें बंधन सुहाते हैं
नदी सागर
अपनी राहें खुद बनाते हैं... !!
गुरुवार, 13 जून 2013
तन्हाई
क्या फसल उगाई है
तन्हाई की
क्या भंडार-घर बनाया है
गुलामी की चिकनी टाइलों से
प्रेम की फुहार..?
अजी बाढ़ भी
कुछ नहीं बिगाड़ सकती
तन्हाई के इस
अनमोल खजाने का...!
बुधवार, 12 जून 2013
या रब
यह कुर्सियां
तू उनके सर में दे मार
जिन्हें इनकी चाहत है
मुझे तो तू
बस
अपने इश्क से नवाजा कर ...!
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