शनिवार, 15 जून 2013

शुक्रवार, 14 जून 2013

मुझे मिले

उसने कहा 
जीवन संघर्ष है 

मुझे लगा 
जीवन प्रेम है 

और हम 
निकल पड़े 
अपनी अपनी डगर 

उसे क्या मिला 
मुझे नहीं मालूम 

मुझे मिली आँखें 
तुम 
और यह पंख ...!
***

राहें

वे कुएं पोखर हैं
जिन्हें बंधन सुहाते हैं

नदी सागर
अपनी राहें खुद बनाते हैं... !!

गुरुवार, 13 जून 2013

तन्हाई

क्या फसल उगाई है

तन्हाई की

क्या भंडार-घर बनाया है
गुलामी की चिकनी टाइलों से

प्रेम की फुहार..?

अजी बाढ़ भी
कुछ नहीं बिगाड़ सकती
तन्हाई के इस
अनमोल खजाने का...!

बुधवार, 12 जून 2013

या रब



यह कुर्सियां
तू उनके सर में दे मार
जिन्हें इनकी चाहत है

मुझे  तो  तू  बस
अपने इश्क से नवाजा कर ...!