गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

सिलवटें

बुधवार, दिसम्बर 30, 2009


सिलवटें
यों मेरे पैराहन में न देख
मैं समुद्र सा
बड़ी दूर तक फैला हूँ दोस्त!

पथ भुजंग

रविवार, जनवरी 03, 2010


पथ भुजंग
पाथेय विष
कैसे आऊँ तुम तक
अमा निशा गिरि  उतंग
पथ भुजंग!

इससे पहले कि


इससे पहले कि
हो चुकी हो बहुत देर

इससे पहले कि वे तुम्हें
टुकड़ा टुकड़ा बाँट चुके हों खेमो में

इससे पहले कि
तुम्हारे औंधे पड़े जिस्म को मरा समझ
गिद्ध बुनने लगें दावतें

इससे पहले कि
इतिहास तुम्हें मुहर बंद कर दे

उठो!
तोडो अपनी यह
सदियों लंबी आत्मघाती नींद

साधो!
असंभव की छाती पर
संभावनाओं की लय ताल

कसो!
बुद्धि की प्रत्यंचा
करो  लक्ष्य वेध
छीन लो अपना स्वत्व

इससे पहले कि
हो चुकी हो बहुत देर

यह स्वत्व क्या है इस पर सबके विचार आमंत्रित हैं

ईश्वर

बृहस्पतिवार, जनवरी 07, 2010


जिन्होनें कहा
ईश्वर प्रकाश  है
उन्होनें यह न कहा
कितने गहन अंधेरों से भिड कर
उपजा यह प्रकाश

उन्होनें यह न कहा
न होने के विरोध में
होने की यात्रा है ईश्वर

उन्होनें यह भी  न कहा
ईश्वर अथक  प्रयोगधर्मिता  है
और हर ठहराव
ईश्वर के खिलाफ जाता है

मैं एक साथ


मैं एक साथ
कितने कितने लोगों से करना चाहता हूँ बात
कुछ रिश्ते जो टूट चुके
कुछ टूटने के कगार पर
कुछ दोस्त जो चाहते उनके खेमे की भाषा बनूँ
कुछ ऐसे जो
मुझ ही में तलाशते अपना बयान
हर आँख इक कुँआ
पता नहीं दर्द के किस समुद्र में खुलता है
मैं डूबना चाहता हूँ हर आँख में
गिने चुने घूंटों में पी जाना चाहता हूँ समुद्र
मैं कितने कितने लोगों से
करना चाहता हूँ बात एक साथ

यह जो

सोमवार, जनवरी 11, 2010


यह जो
डरा डरा खोया सा
कुछ न कुछ
पाने की चाह में मारा मारा
अदृश्य रस्सियों में बंधा
सोचता ही रहता
कुछ न कुछ
हर समय

यह जो
कदम भर भी
चल नहीं पाता
और नाप आता है
ब्रह्मांडीय  दूरियां  
देख नहीं पाता कुछ भी
सजाता रहता
ध्वनियों  की
चित्रों की
शब्दों  की दुनिया

यह जो .. .. ..

प्यार और नफरत

रविवार, जनवरी 17, 2010


प्यार के बदले प्यार
सब करते हैं

नफरत के बदले नफरत
सब करते हैं

प्यार के बदले नफरत
कोई विरला ही करता है
जैसे तू

नफरत के बदले प्यार
विरलों में कोई विरला
जैसे मैं