गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

इससे पहले कि


इससे पहले कि
हो चुकी हो बहुत देर

इससे पहले कि वे तुम्हें
टुकड़ा टुकड़ा बाँट चुके हों खेमो में

इससे पहले कि
तुम्हारे औंधे पड़े जिस्म को मरा समझ
गिद्ध बुनने लगें दावतें

इससे पहले कि
इतिहास तुम्हें मुहर बंद कर दे

उठो!
तोडो अपनी यह
सदियों लंबी आत्मघाती नींद

साधो!
असंभव की छाती पर
संभावनाओं की लय ताल

कसो!
बुद्धि की प्रत्यंचा
करो  लक्ष्य वेध
छीन लो अपना स्वत्व

इससे पहले कि
हो चुकी हो बहुत देर

यह स्वत्व क्या है इस पर सबके विचार आमंत्रित हैं

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