तुम्हें करते हुए याद
तुम्हें करते हुए याद
मुझे लगता है डर
तेरी नींद में जाकर
मेरी याद
कोई बवाल न कर दे
तुम कहीं भटक न जाओ
किसी सपने के बेतरतीब
डरावने
और खूबसूरत जंगल में
हमारे बीच की यह दूरी
किसी और यात्रा का
रुख न कर ले
डरता हूँ
तुम्हें करते हुए याद
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें