गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

एक छोटे से कवि की छोटी छोटी बातें

सोमवार, दिसम्बर 28, 2009


एक
हर  कोई
स्वयं  को  खास  ही समझता है
फिर वह  आम आदमी कहाँ है
जिसकी हम चर्चा करते हैं

दो
तुमसे मिल नहीं पाता
बिना किसी रिश्ते की आड़ के
तुमसे मिलना चाहता हूँ
बिना किसी रिश्ते की आड़ के

तीन
जितना जमा किया हमने
तिजोरियों में सोना
उतने ही थमाए हथियार
वानरों  के   हाथ
अब किसलिए
किस बात का रोना धोना

चार
सिर्फ एक परिवर्तन हुआ है
अहिंसा से  अ  निकल कर
सत्य से जुड़ गया है

पांच 
दुनिया  का सबसे जागा हुआ आदमी था कुम्भकरण  

छ 
प्यास नहीं पूछती
पानी का धरम पानी की जात
प्यास प्यास होती है
पानी! पानी
एक दूजे के लिए

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