गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

वक्त

रविवार, दिसम्बर 27, 2009


वक्त
जेब कतरा वक्त
न जाने 
कब से लगा था पीछे
और अचानक . .
 सब खो गया

किस थाने .. 
करूं शिकायत 
अपनी ही बेख्याली का
आता है रोना

क्यों चला आया
चेहरों पर चढ़े चेहरे
इस शहर को देखने
रखा ही क्या था यहाँ

हर आस नकली
 हर सपना झूठा

वक्त जेबकतरा 
हाकिम इस शहर का..

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