रविवार, 26 सितम्बर 2010
अदा ! हाँ.. यही पेज तो लेना है आज ! आज तो मुझे अपनी इसी दिलरुबा से बात करनी है !..वैसे,
जब अखबार से यह तस्वीर उतारी थी, तब यह नहीं सोचा था की इस पर भी कभी कुछ
लिखूंगा ! बस खटक गया था कुछ भीतर.. शायद ! यह मेरी कविता है..!
बायीं
हथेली पर धरी ठुड्डी .. मुड़ी हुई उंगलियाँ, बायीं गाल में धंसी हुई !
गिरती हुई बालों की लट, जैसे कश्मीर के रस्ते में नासरी-नाले के पास एक
पतली सी जल-धारा.. एक ऊँचाई से गिरती हुई !
प्रसिद्ध
फ़िल्मी हस्तियों के चेहरे, मेरे इसी काम तो आते हैं मेरी इस अनाम
गुड़िया-बेबी का चेहरा, जवानी में, फिल्म-अभिनेत्री राखी के मुहांदरे के
आस-पास ठहरता है ..
चेहरों
में मेरी दिलचस्पी ! आम सी बात है.. हम सब चेहरों में ही तो जीते
हैं..जितने चेहरे बाहरी दुनिया में दिखते हैं; उसके दस गुणा तो हमारे भीतर
टहलते रहते हैं ! इस चेहरे का तो मुझे नाम भी नहीं मालूम .. पर खास बात ..
यह अदा ! कुशल से कुशल निर्देशक और मंझे हुए कलाकार के भी पसीने छूट जायें
इसे पकड़ने में ! मुझे तो जैसे बिन मांगे मोती मिल गया ! यह मेरी कविता !
अदा
! इससे पहले कि असली मुददे पर आया जाये, वो वारदात तो बतानी होगी, जिसने
तेरी इस अदा को कैमरा दिया..खास कुछ नहीं, इंडिया मैच हार गया था उस दिन !
वही किरकट ! क्या होती है किरकट.. क्या होता है मैच ! मेरी जाने बला ! कौन
जीतता है, कौन हारता है.. अपनी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता !
पर मुझे यह मैच रास आ गया..टकसाली चेहरों की भीड़ में यह अदा कहाँ से मिलती अगर इंडिया मैच न हारता !
हाय
! क्या संजीदा चेहरा और आँखों में लरजते हुए तूफ़ान ! नाक की नोक पर सजा
हुआ गुस्सा ! कसे होंट! पता नहीं कितनी-कितनी खट्टी मीठी गालियां चबाते हुए
! जैसे पता नही क्या हो गया है ! नहीं अदा तेरी भावनाओं को ठेस नहीं
पहुंचा रहा .. न ही कोई मजाक उड़ा रहा हूँ ..मैं तो सिर्फ उन खूबसूरत पलों
को शब्द देने की कोशिश में हूँ जिसे उस कैमरा कलाकार ने कैद किया है ! पर
मुझे कुछ और भी कहना है.. हमारी यह राष्ट्र-भक्ति, हमारा यह भारत-प्रेम, यह
जनू-ए-इंडिया ! क्रिकेट- प्रेम की झालर बन कर क्यों रह गया है ? इतनी
संकुचित क्यों है हमारी दृष्टि, कि मात्र क्रिकेट मैच के हारने का यों मातम
मनाया जाये ..? क्या
खेल को, खेल की भावना से नहीं लिया जाना चाहिए! बेशक, हम हारे, तभी तो
दूसरा जीता! ..क्या हम अपनी हार को एक तरफ रख कर, दूसरे की जीत में शरीक
नहीं हो सकते ? ..और जिसकी जीत में हम शरीक नहीं हो सकते उसके साथ हमें
खेलना ही क्यों चाहिए ?
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