बुधवार, 26 जनवरी 2011
अद्वैत
क्या है ? दो विपरीत अतियों का संगम .. जितना ताप, उतनी शीत; जितना
प्रकाश, उतना ही अन्धकार; जब एक दूसरे में समा जाएँ तो परिणाम क्या है ?
इसे आप कविता की भाषा में पूर्ण कह सकते हैं.. गणित की भाषा में शून्य!
हाकिंस, एक तरफ व्यक्त ब्रह्म की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ ईश्वर के
अस्तित्व से इनकार कर रहे हैं, यद्यपि, उनका होना या मेरा या आपका होना,
ईश्वर के होने का अकाट्य प्रमाण है.. वे विज्ञान के नियमों को सर्वोपरी
कह रहे हैं .. वे शुरुआत भौतिकी से नहीं मान रहे .. भौतिकी के नियमों से
मान रहे हैं... उनकी भाषा में " ईश्वर यदि है तो विज्ञान के नियम हैं THE
LAW ITSELF".. हमारे यहाँ भी तो ज्ञान को स्वयम्भू कहा गया है.. परमात्मा
को ज्ञानस्वरूप ही कहा गया है ..हमारे यहाँ जिसे अव्यक्त ब्रह्म कहा गया है
उसे वे black energy नाम दे रहे हैं ..इस BLACK ENERGY के बारे में कुछ कह
भी नहीं पा रहे...लेकिन, जितना कुछ कह रहे हैं वह उन्हीं निष्कर्षो तक आ
रहा है जिन्हें इस देश की मनीषा छू चुकी है..
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