मंगलवार, 28 सितम्बर 2010
वह एक पल
जब उस कलाकार ने तुम्हें
कैमरे में उतारा होगा
कितना कुछ तय कर गया
मेरी मंजिलों-मुकाम का रुतबा
तुमसे मेरा रिश्ता
मेरी महबूब
अखबार में छपी
तेरी तस्वीर
मैं तो देखूँगा तेरी तस्वीर
और शब्दों को
करने दूंगा अपना काम
जिन्हें मैंने
जन्मों से पाल रखा है
मधु-मक्खियों और
तितलियों की तरह
कितनी मूंगफलियों का
लिफाफा बनी होगी
तेरी तस्वीर
लिफाफा बनी होगी
तेरी तस्वीर
यह जो
मेरे हिस्से में चली आयी है
मेरे हिस्से में चली आयी है
बनाएगी कितने लिफाफे
मेरे दिल के
ओ मरीचिका !
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