गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

इश्क

मंगलवार, 2 नवम्बर 2010


मजाजी हो हकीकी हो 
इश्क तो इश्क है 
वे जो चिढते हैं इश्क से 
अगर देख पाते 
यह करिश्मा ..यह कायनात ..
यह सारे का सारा वजूद 
है किसी के इश्क का नजारा 
पर 
उन्होंने तो बाँध रक्खी हैं
आँखों पर पट्टियाँ  
हवा में भांजते फिरते हैं लाठियां 
शायद 
ये उनका शौक हो या पेशा 
हुआ करे 
मुझे क्या एतराज 
वे खंदके खोदें 
खाईयों को और चौड़ा करें 
झूठ और नफरत की आग में 
सडें लडें मरें 

मैं उन्हें रोकूँगा नहीं 
बस 
तौहीने इश्क न करें 
इस कुफ्र की 
कहीं कोई तौबा नहीं 

श्याम जुनेजा

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