मैं समुद्र ही हो सकता था
सोमवार, 2 दिसंबर 2013
कहाँ तक
ओ मेरी
महत्वाकांक्षाओं
ओजोन की परतें भी फट चुकीं
चन्द्र, मंगल, बुध
सब छूटे पीछे
सूर्य भी किया पार
कहाँ तक ले जाओगी मुझे
कहाँ तक.. कहाँ तक.. कहाँ तक
५.८.२००४
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