मैं समुद्र ही हो सकता था
सोमवार, 2 दिसंबर 2013
गम
गम
ऐसा तेज़ाब होता है
दिल
जिस्मों जां तक ही
नहीं
रूह तक का अज़ाब होता है
गम के मारों के लिए
पीना सवाब होता है
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