सोमवार, 2 दिसंबर 2013

छतीस

कभी कोई 
नन्हा सा प्रश्न 
लबरेज़ मासूमियत के साथ 
पूछ बैठता है 
यह छतीस क्या होते हैं अंकल 


थर्टी सिक्स कहते हुए 
मेरे होंठ कांप जाते हैं 

कैसे कहूँ उससे 
यह तुम्हारी राष्ट्र-भाषा से हुआ  
साभिप्राय छल है 

कैसे समझाऊँ उसे 
यह सारा  खेल 
यह पढ़ाई
यह ताम-झाम 
तुम्हें 
छतीस के आँकड़े में 
धकेलने की  
तैयारी है 

और 
जब तुम 
समझ पाते हो तरेसठ 
उम्र गुजर चुकी होती है  


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