कभी कोई
नन्हा सा प्रश्न
लबरेज़ मासूमियत के साथ
पूछ बैठता है
यह छतीस क्या होते हैं अंकल
थर्टी सिक्स कहते हुए
मेरे होंठ कांप जाते हैं
कैसे कहूँ उससे
यह तुम्हारी राष्ट्र-भाषा से हुआ
साभिप्राय छल है
कैसे समझाऊँ उसे
यह सारा खेल
यह पढ़ाई
यह ताम-झाम
तुम्हें
छतीस के आँकड़े में
धकेलने की
तैयारी है
और
जब तुम
समझ पाते हो तरेसठ
उम्र गुजर चुकी होती है
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