सोमवार, 2 दिसंबर 2013

लोकतंत्र

 

नहीं !
कोई जुआ नहीं ! 
तुमनें इनकार किया 

शाबाश !
उन्होनें थपथपाई तुम्हारी पीठ  
यही है क्रान्ति' 

हकूमत के हक में तो
हम भी नहीं 

पर 
तुम्हारे भले के लिए
कुछ तो चाहिए 
(तुम्हें जुतना है 
हमें करनी है सवारी)

ऐसा करो 
तुम चुनो "हमें"
हमारी शर्तों के साथ

और 
बड़ी शान के साथ 
वे लंगड़े लोकतंत्र का 
तांगा चला रहे हैं 

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