वाह!
धडाक से कहा दिल ने
हाँ !
इसे कहते हैं ..कवि होना !
जीवन की इस
घनीभूत असहजता में से
सहजता को तलाश लेना
जटिलतम से
सरलतम को चीन्ह लेना
कवि होना
प्रश्न-चिन्ह होना है
कवि होना
जैसे किसी सेल में
बिजली का होना
जैसे किसी देह में
धडकनों का होना है
(बलदेव वंशी को सुनकर )
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें