1.
जुबाँ की आँख नहीं
आँख बे-जुबाँ मेरी
आँख बे-जुबाँ मेरी
कहूँ तो किससे कहूँ
क्या है दास्ताँ मेरी
क्या है दास्ताँ मेरी
फलक ने खोल दिए राज़ सब
जो पिन्हा थे
जो पिन्हा थे
कामन वेल्थ खेल
और यह जाँ मेरी
--श्याम
और यह जाँ मेरी
--श्याम
2.
दांत बेचारे क्या करें
कुछ फौजी हैं कुछ गुन्डे हैं
चबाते हैं
हुकम बजा लाते हैं
खतरनाक तो है जुबाँ
स्वादों की मारी
दुखियारी
सिर्फ हुक्म चलाती है
दिल्ली को
कामन वेल्थ बना जाती है
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