सोमवार, 2 दिसंबर 2013

कामन वेल्थ

1.
जुबाँ की आँख नहीं 
आँख बे-जुबाँ मेरी 
कहूँ  तो किससे कहूँ 
क्या है दास्ताँ मेरी 
फलक ने खोल दिए राज़ सब 
जो पिन्हा थे 
कामन वेल्थ खेल 
और यह जाँ मेरी
 --श्याम 

2.
दांत बेचारे क्या करें 
कुछ फौजी हैं  कुछ गुन्डे हैं 
चबाते हैं 
हुकम बजा लाते हैं 

खतरनाक तो है  जुबाँ 
स्वादों की मारी 
दुखियारी 
सिर्फ हुक्म चलाती है 

दिल्ली को   
कामन वेल्थ 
बना  जाती  है


शुक्रवार, 24 सितम्बर 2010

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