मैं समुद्र ही हो सकता था
सोमवार, 2 दिसंबर 2013
हम तो आदमी हैं
जिंदगी जब
सिद्धांतों और आदर्शों में
अटक जाती है
किताबों और उद्धेश्यों में
भटक
जाती है
जिंदगी तब ..
जिंदगी नहीं
गुलामी बन जाती है
गुलामी !
आप जानते हैं
पशुओं को भी स्वीकार्य नहीं
हम तो आदमी हैं
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