सोमवार, 2 दिसंबर 2013

सोमाद्री

बेचारा मेरा ब्लॉग
कभी-कभार कोई भूला-भटका राही 
उधर से निकल पाता है..
आज तो कमाल हो गया  
सबसे पहले सोमाद्री नाम
अपने आप में कविता  
उस पर ब्लॉग का नाम सोमरस
उस पर आपकी कविता ! 
अभी-अभी किसी ने मुझे
White wine
पीने कि सलाह दी थी..
इस त्रिवेणी के बाद कैंसल .. 
टिपण्णी के लिए
धन्यवाद ..

यह कैसी  दुनिया
जहाँ प्यार छाते में छुपकर
जंग और दंगे खुले आम
इस तस्वीर ने
दिल की ट्राफी जीत ली है सोमाद्री

बियर को ले कर
कुछ कहना तो भूल ही गया ..
मेरे बस में हो
तो सारी शराब सारी कोकाकोला
सारे ठन्डे पेय बंद करवा दूं
बियर मुफ्त करवा दूं
छबीलें लगवा दूं
पियो बियर ते हो जाओ बागी
घर दे जीन गे अपने भागी
वैसे मैंने कभी ज्यादा नहीं पी
ज्यादा क्या कम भी नहीं पी
शौक है पीने का
मुफ्त मिले तो
यह तस्वीर जो दिख गयी
सुना है दिल दिमाग को ठंडा रखती है
सोमरस
शायद इसी का वैदिक नाम था
कई बार सोचता हूँ
अगर बियर मुफ्त हो जाये
 इसकी छबीलें लग जाएँ
तो शायद दृश्य बदल जाये
दंगे और जंग
छातों के नीचे होने लगे
और प्यार खुले आम  .
.पियो बियर ते करो प्यार
दन्गाइयां नू जूतियाँ चार
वैसे मैंने कभी
ज्यादा नहीं पी
ज्यादा क्या कम भी नहीं पी
कुल एकाध बार जीवन में
शौक है पीने का
मुफ्त मिले तो
यह तस्वीर जो दिख गयी
सुना है
दिल दिमाग को ठंडा रखती है  
लो बंदा तो गया
नाम पढ़ा और बहक लिया 

@ताज महल या तेजोमहालय
जिंदगी जीने का
कोई सही सलीका सिखा रहा है ?
उपद्रवों और दुखों से मुक्त होकर
जीने कि कोई राह बता रहा है ?
यदि नहीं
तो इनकी कीमत
कूड़े से अधिक नहीं है
हिंदू होना, मुस्लमान होना
या कमुनिस्ट होना या कुछ और होना
सब होना कूड़ा है
यदि
इंसान होना छूट जाता है

जीवन प्यार ईश्वर और स्वतंत्रता
इतना ही सत्य है
और
 इन्हें किसी इमारत
किसी इतिहास
किसी राजनीती कि जरूरत नहीं  !
 


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