जिसे भी पूछा
उसी ने खोली दुखों की पोटली
जहां भी गया वहीं पाया
अनजान चौराहा
हर आँख में
इक याचक देखा
हर आत्मा जैसे भिक्षा-पात्र
कहानिया भूल चुका हूँ
भूल चुका हूँ गीत प्यार के
नृत्य भी खो चुका कब का
क्या मैं जीवित हूँ
क्या हम जीवित हैं
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