सोमवार, 2 दिसंबर 2013

विलोम भाव

मैं आदमी
भले ही गाता रहूँ
अपनी महानता के गीत
पर सच यह है कि मैं
जीवन, प्यार,
ईश्वर और स्वतंत्रता का
विलोम भाव हूँ

कितना कितना रक्तपात
कितना अश्रुपात किया है
करवाया है मैंने
फिर भी 
यह धरती सहे जाती है
सूर्य दिए जाता है मुझे जीवन

सभ्य हो पाने की संभावना
बार बार टकराती है मुझसे
लौट लौट जाती है
इस गूँज के साथ
नहीं! अभी नहीं

मैं आदमी
भले ही गाता रहूँ
अपनी महानता के गीत
पर सच यह है .. मैं
जीवन, प्यार,
ईश्वर और स्वतंत्रता का
विलोम भाव हूँ

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