निगाहें चुराने में क्या रक्खा है
नजरें मिलाना कुछ और बात है
बातें बनाना सभी को आता है
करके दिखाना कुछ और बात है
करके दिखाना कुछ और बात है
कुफ्र हर हाल में
जनूं-ए-जिहाद-ओ-नादानियां
नगमा-ए-नूर-ओ-जीस्त सुन पाना
कुछ और बात है
जनूं-ए-जिहाद-ओ-नादानियां
नगमा-ए-नूर-ओ-जीस्त सुन पाना
कुछ और बात है
नमाज-ओ-दुआ भी
बे-मकसद नहीं श्याम इबादत का उतर आना कुछ और बात है
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