मेरी आँखों में
जल रही है नींद
जल रही है नींद
कौंध रहे किरचों से
कुछ सपने कोरे
इस धुएं में
मुझे कुछ नहीं सूझता
कहाँ हैं
शब्द... अर्थ ...ध्वनियाँ
सभी तो जल रहे हैं
यह तिड़ तिड़ की आवाज़
आप भी तो सुन रहे हैं
फिर भी पूछते हैं
क्या हुआ ?
पर
क्या होगी
आपकी दिलचस्पी
कुछ शब्द बटोरेंगे
उन्हें तलेंगे
पकाएंगे
खायेंगे और भूल जायेंगे
खायेंगे और भूल जायेंगे
बेकार है
आपसे कुछ कहना
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