सोमवार, 2 दिसंबर 2013

बेकार है

मेरी आँखों में 
जल रही है नींद 
कौंध रहे किरचों से 
कुछ सपने कोरे 

इस धुएं में 
मुझे कुछ नहीं सूझता 


कहाँ हैं 
शब्द... अर्थ ...ध्वनियाँ 
सभी तो जल रहे हैं 

यह तिड़ तिड़  की आवाज़ 
आप भी तो सुन रहे हैं 
फिर भी पूछते हैं 
क्या हुआ ?

पर 
क्या होगी
 आपकी दिलचस्पी 
कुछ शब्द बटोरेंगे 
उन्हें तलेंगे
पकाएंगे 
खायेंगे और भूल जायेंगे 

बेकार है  
 आपसे कुछ कहना 
 

बुधवार, 22 सितम्बर 2010

 

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