न उसे देखा था कभी
न सुना कभी
न कुछ लेना था उससे
न कुछ देना था उसे
फिर भी उसकी याद
जैसे
गर्म दोजख दिनों में
बरसात की फुहार सी
चूम गई है मुझे
अभी के अभी
यूं ही बैठे-ठाले
सोचने लगा हूँ
आखिर क्या हुआ था ऐसा
हमारे बीच
जो वह शोख कली यूं रूठ गई
पलट कर पूछा तक नहीं
मरीजों का हाल
जरूरी है
बहुत जरूरी है
कुछ चीज़ों कुछ रिश्तों पर
लिखा रहना
(:हँडल विद केयर:)
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