मैं समुद्र ही हो सकता था
सोमवार, 2 दिसंबर 2013
शायद यह देश ...
निकाल कर जंजीरों से
टांग दिया सलीब पर
अब किसी हथौड़े की चोट
किसी कील की चुभन
कोई असर नहीं करते
शायद यह देश ...
यह मेरा देश ..
मेरी आँखों में तो अब
पानी भी नहीं है ...
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