सोमवार, 2 दिसंबर 2013

विरसे में




विरसे में बस एक किताब
दशकों फैली 
मृगतृष्णा सी एक किताब 

बच पाएगा 
कब तक इसका सच 
जिल्दे पर तो
पंजा मारे बैठे है 
केतु के धड 
राहू के सिर
"सत्यमेव जयते पर"

विरसे में बस यही  किताब
दशकों फैली 
मरू-भूमि सी... यही किताब

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