विरसे में बस एक किताब
दशकों फैली
मृगतृष्णा सी एक किताब
बच पाएगा
कब तक इसका सच
जिल्दे पर तो
पंजा मारे बैठे है
पंजा मारे बैठे है
केतु के धड
राहू के सिर
"सत्यमेव जयते पर"
विरसे में बस यही किताब
दशकों फैली
मरू-भूमि सी... यही किताब
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