सोमवार, 2 दिसंबर 2013

फलो फूलो ओ पृथ्वी


शायद
यह पृथ्वी
मरू की अनंतता में
जीवन की आहट है

शायद
किसी और सौरमंडल के
किसी ग्रह उपग्रह को
मेरी प्रतीक्षा है

शायद
किसी दिन
हरा भरा होगा ब्रह्मांड

फलो फूलो ओ पृथ्वी


2 दिसम्बर 2009

1 टिप्पणी:

  1. इंसानी ताक -झांक से सुदूर प्रकृति के रंग में डूबी सुन्दर रचना प्रस्तुति के लिए धन्यवाद ..

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